द ईगल बेल: गरुड़-घंटी का रहस्य

 द ईगल बेल: गरुड़-घंटी का रहस्य

द हिडन ऑक्शन (गुप्त नीलामी)
Garuda Ghanti


न्यूयॉर्क शहर, अमेरिका। रात के 11 बज रहे थे। मैनहट्टन की एक गगनचुंबी इमारत के बेसमेंट में एक गुप्त नीलामी चल रही थी। यह नीलामी आम कलाकृतियों की नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे रहस्यमयी और चोरी की गई प्राचीन वस्तुओं की थी।

आर्यन खन्ना, एक भारतीय पुरातत्वविद् (Archaeologist) और सिम्बोलॉजिस्ट (प्रतीक-शास्त्री), इस नीलामी में एक अमीर शेख के भेष में शामिल हुआ था। उसे भारतीय सरकार के एक गुप्त मिशन पर भेजा गया था। खबर थी कि आज यहाँ कुछ ऐसा बिकने वाला है जो भारत के किसी प्राचीन मंदिर से सदियों पहले गायब हुआ था।

नीलामीकर्ता ने मखमली परदा हटाया। वहाँ एक कांच के बक्से में एक अद्भुत वस्तु रखी थी—एक "गरुड़-घंटी" (Garuda Bell)।
यह सामान्य पूजा की घंटी नहीं थी। यह अष्टधातु की बनी थी, जिस पर गरुड़ की आकृति उकेरी गई थी, लेकिन गरुड़ के पंख सामान्य नहीं थे—वे किसी जटिल गणितीय समीकरण (Mathematical Equation) की तरह दिख रहे थे। और सबसे अजीब बात—घंटी हवा में बिना किसी सहारे के तैर रही थी (Levitating)।

"देवियों और सज्जनों," नीलामीकर्ता फुसफुसाया, "यह है 'विमान-घंटी'। कहा जाता है कि यह महाभारत काल के पुष्पक विमान की नेविगेशन कुंजी (Key) है। बोली 50 मिलियन डॉलर से शुरू होती है।"

आर्यन की साँसें थम गईं। यह वही घंटी थी जिसका ज़िक्र 'वैमानिक शास्त्र' के लुप्त अध्यायों में था।

घंटी की चोरी
इससे पहले कि आर्यन बोली लगा पाता, हॉल की बत्तियाँ गुल हो गईं। अंधेरे में गोलियों की आवाज़ गूँजी और कांच टूटने की खनक हुई। भगदड़ मच गई।
जब आपातकालीन लाइटें जलीं, तो आर्यन ने देखा—कांच का बक्सा खाली था। घंटी गायब थी।

लेकिन आर्यन की नज़र एक नकाबपोश आकृति पर पड़ी जो पिछले दरवाज़े से भाग रही थी। आर्यन ने उसका पीछा किया। न्यूयॉर्क की सड़कों पर एक तेज़ दौड़ शुरू हुई। चोर ने एक काली एसयूवी में छलांग लगाई और गायब हो गया। आर्यन ने गाड़ी का नंबर नोट कर लिया, लेकिन ज़मीन पर उसे एक चीज़ मिली—चोर की जेब से गिरा एक विज़िटिंग कार्ड। उस पर एक अजीब सा लोगो था—एक आँख और पिरामिड, और नीचे लिखा था: "ओरियन लेबोरेटरीज, नेवादा।"

नेवादा का रेगिस्तान
आर्यन ने अपनी साथी, सारा (एक अमेरिकी पत्रकार और हैकर), से संपर्क किया।
"सारा, ओरियन लेबोरेटरीज के बारे में पता लगाओ। वे एक प्राचीन भारतीय तकनीक को एक्टिवेट करने की कोशिश कर रहे हैं।"

सारा ने जानकारी निकाली। "आर्यन, यह लैब नेवादा के रेगिस्तान में 'एलिया 51' के पास है। इसका मालिक डॉ. रिचर्ड स्टोन है, जो एक पागल वैज्ञानिक है। वह मानता है कि प्राचीन देवता दरअसल एलियंस थे और उनकी तकनीक ध्वनि (Sound) पर आधारित थी।"

आर्यन नेवादा पहुँचा। रेगिस्तान की तपती गर्मी में वह और सारा एक टूरिस्ट वैन में छिपकर ओरियन लैब के करीब पहुँचे। लैब एक किले जैसी थी।

ध्वनि का विज्ञान
रात के अंधेरे में, सारा ने लैब का सुरक्षा सिस्टम हैक किया और वे अंदर घुस गए।
लैब के मुख्य कक्ष में एक विशाल मशीन थी, जिसके केंद्र में वह 'गरुड़-घंटी' रखी थी। डॉ. रिचर्ड स्टोन वहाँ खड़े थे।

"फ्रीक्वेंसी बढ़ाओ!" रिचर्ड चिल्लाया।

आर्यन एक खंभे के पीछे से देख रहा था। वैज्ञानिक घंटी पर लेज़र बीम डाल रहे थे। घंटी बजने लगी।
टन्न्न्....
आवाज़ बहुत धीमी थी, लेकिन उसका कंपन (Vibration) इतना तेज़ था कि लैब के कांच के बीकर चटकने लगे।

"यह क्या कर रहे हैं?" सारा ने पूछा।

"ये 'नाद ब्रह्म' को छेड़ रहे हैं," आर्यन ने कहा। "गरुड़-घंटी कोई साधारण घंटी नहीं है। यह एक 'सोनिक रेज़ोनेटर' (Sonic Resonator) है। प्राचीन काल में इसका उपयोग भारी पत्थरों को उठाने (Acoustic Levitation) या विमानों को ऊर्जा देने के लिए होता था। लेकिन अगर इसकी फ्रीक्वेंसी गलत हो गई, तो यह एक भूकंपीय तरंग पैदा कर सकती है।"

अचानक, घंटी का रंग बदलने लगा। वह सुनहरे से नीला हो गया। लैब की ज़मीन कांपने लगी।

गरुड़ का क्रोध
"मूर्ख!" आर्यन चिल्लाया और बाहर निकल आया। "इसे बंद करो रिचर्ड! तुम पृथ्वी की टेक्टोनिक प्लेट्स को हिला रहे हो।"

रिचर्ड हँसा। "आह, मिस्टर खन्ना! मुझे पता था तुम आओगे। तुम इसे धर्म समझते हो, मैं इसे विज्ञान समझता हूँ। इस घंटी की आवाज़ से मैं अनंत ऊर्जा का स्रोत खोलूँगा।"

घंटी की आवाज़ अब असहनीय हो गई थी। लैब के कर्मचारी कान पकड़कर ज़मीन पर गिर पड़े। मशीनरी स्पार्क करने लगी। घंटी के ऊपर हवा में एक भंवर (Vortex) बनने लगा।

"यह ऊर्जा का स्रोत नहीं, ब्लैक होल है!" आर्यन ने चिल्लाया।

उसने देखा कि घंटी के गरुड़ की आँखों में एक विशिष्ट रत्न लगा था। उसे याद आया कि उसके दादाजी ने बताया था—गरुड़ को शांत करने के लिए उसे 'विष्णु-पद' चाहिए।
आर्यन ने अपनी जेब से एक छोटा सा तांबे का लॉकेट निकाला, जिस पर एक विशिष्ट ज्यामितीय आकृति (यंत्र) बनी थी। यह उसे भारत सरकार ने दिया था।

आर्यन मशीन की ओर दौड़ा। रिचर्ड के गार्ड्स ने गोली चलाई, लेकिन कंपन इतना तेज़ था कि गोलियाँ अपना रास्ता भटक गईं। आर्यन ने छलांग लगाई और घंटी के ठीक ऊपर बने उस भंवर के केंद्र में अपना लॉकेट फेंक दिया।

शून्य की गूंज
जैसे ही लॉकेट घंटी से स्पर्श हुआ, एक तेज़ आवाज़ आई—जैसे हज़ार शंख एक साथ बज उठे हों।
ऊँ.....

घंटी का कंपन अचानक रुक गया। नीला भंवर गायब हो गया। घंटी धीरे से नीचे मशीन पर आ गिरी।
लैब में सन्नाटा छा गया।

रिचर्ड स्टोन घुटनों पर गिर पड़ा। "नहीं! तुमने मेरी सालों की मेहनत बर्बाद कर दी!"

तभी एफबीआई (FBI) और इंटरपोल की टीम, जिसे सारा ने पहले ही अलर्ट कर दिया था, लैब में घुस आई। रिचर्ड और उसके साथियों को गिरफ्तार कर लिया गया।

घर वापसी
एक हफ्ते बाद।
वाशिंगटन डी.सी. में भारतीय दूतावास में एक समारोह था। गरुड़-घंटी को एक विशेष सुरक्षित केस में रखा गया था, जिसे भारत वापस भेजा जा रहा था।

आर्यन खन्ना घंटी को देख रहा था। अब वह शांत थी, एक निर्जीव धातु के टुकड़े जैसी।
सारा ने पूछा, "तुम्हें क्या लगता है, वह सच में एलियन तकनीक थी?"

आर्यन मुस्कुराया। "एलियन नहीं, सारा। यह हमारे पूर्वजों का 'एडवांस्ड एकोस्टिक्स' (Advanced Acoustics) था। वे जानते थे कि ध्वनि ही सृष्टि का आधार है। हमने उसे भुला दिया, इसलिए आज वह हमें जादू या एलियन लगता है।"

जैसे ही आर्यन ने विदा लेने के लिए घंटी के केस को हाथ लगाया, उसे एक हल्का सा कंपन महसूस हुआ। बहुत धीमा... जैसे कोई दिल धड़क रहा हो।
गरुड़ की आँख एक पल के लिए चमकी और फिर शांत हो गई।

रहस्य अभी पूरी तरह सुलझा नहीं था, बस सुरक्षित हाथों में था।

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