श्वेत संजीवनी: चूना एक अमृत
रामदीन का दर्द और शहर की दवाइयां
उत्तर प्रदेश का एक छोटा सा गाँव था—'रामनगर'। यहाँ के रामदीन काका पूरे गाँव में अपनी मेहनत के लिए जाने जाते थे। 55 साल की उम्र में भी वे खेतों में कुदाल चलाते थे। लेकिन पिछले छह महीनों से उनका जीवन बदल गया था। उनके घुटनों में इतना दर्द रहने लगा था कि वे चार कदम चलने में भी कराह उठते थे।
गाँव के डॉक्टर ने कहा, "रामदीन, तुम्हारे घुटनों का ग्रीस (Synovial Fluid) खत्म हो गया है और हड्डियाँ घिस रही हैं। शहर जाकर ऑपरेशन करा लो, नहीं तो बैसाखी का सहारा लेना पड़ेगा।"
ऑपरेशन का खर्चा सुनकर रामदीन के होश उड़ गए। "दो लाख रुपए! डॉक्टर साहब, इतने में तो मेरा खेत बिक जाएगा।"
रामदीन घर पर खाट पकड़ कर बैठ गए। उनकी पत्नी, सुमित्रा, रोज उनके घुटनों पर तेल मालिश करती, लेकिन दर्द था कि जाने का नाम नहीं ले रहा था। साथ ही, रामदीन को अक्सर मुँह में छाले हो जाते थे और रीढ़ की हड्डी में भी टीस उठती थी।
उसी दौरान, गाँव के पुराने मंदिर के पास एक संत महात्मा का आगमन हुआ। लोग उन्हें 'भार्गव बाबा' कहते थे। कहा जाता था कि वे जड़ी-बूटियों के ज्ञानी हैं। सुमित्रा ने जिद की, "काका, एक बार बाबा को दिखा लो। सुना है उनके पास हर मर्ज की दवा है।"
रामदीन लंगड़ाते हुए, पत्नी के सहारे बाबा की कुटिया तक पहुंचे।
सत्तर बीमारियों की एक दवा
बाबा भार्गव ने रामदीन को देखा। वे बिना नाड़ी देखे ही बोले, "हड्डियाँ कटकट बोलती हैं? कमर झुक गई है? और मुँह में छाले भी हैं?"
रामदीन हैरान रह गए। "बाबा, आप अंतर्यामी हैं!"
बाबा हँसे। "नहीं बेटा, मैं वैद्य हूँ। यह सब 'वात' के लक्षण हैं। तुम्हारे शरीर में कैल्शियम (Calcium) की भारी कमी हो गई है। जब शरीर में कैल्शियम कम होता है, तो केवल हड्डियाँ ही नहीं, बल्कि 70 तरह की बीमारियाँ आती हैं।"
रामदीन ने हाथ जोड़े, "बाबा, मैं गरीब किसान हूँ। महंगी भस्म या सोना-चांदी की दवा नहीं खा सकता।"
बाबा ने अपनी झोली से एक छोटी सी पुड़िया निकाली और उसमें से एक सफ़ेद पत्थर का टुकड़ा दिखाया।
"इसे पहचानते हो?"
रामदीन ने ध्यान से देखा। "अरे! यह तो पान वाला चूना है। इसे तो लोग तंबाकू के साथ खाते हैं।"
बाबा गंभीर हो गए। "यही तो इस कलयुग का दुर्भाग्य है। जिस अमृत को औषधि के रूप में खाना चाहिए था, लोग उसे ज़हर (तंबाकू) के साथ खाकर बदनाम कर रहे हैं। रामदीन, यह चूना नहीं, यह 'अमृत' है। यह वात की 70 बीमारियों को अकेले ठीक कर सकता है।"
गेहूँ के दाने का रहस्य
बाबा ने रामदीन को चूना खाने का सही तरीका बताया, जो एक विज्ञान था:
मात्रा (Quantity): "सिर्फ एक गेहूँ के दाने के बराबर। न उससे कम, न उससे ज्यादा। ज्यादा खाओगे तो जीभ काट देगा और पेट में पथरी कर सकता है।"
अनुपान (Medium): "इसे कभी भी सीधे मुँह में नहीं डालना। इसे दही में, लस्सी में, दाल में, या सादे पानी में घोलकर पीना है। सबसे उत्तम है दही या मठा।"
समय: "सुबह खाली पेट या नाश्ते के बाद। दिन में एक बार।"
सावधानी: "जिसे पथरी (Kidney Stone) की शिकायत हो, उसे चूना भूलकर भी नहीं खाना चाहिए।"
रामदीन ने नियम बांध लिया। वे रोज़ सुबह एक मिट्टी के कुल्हड़ में ताजी दही लेते, उसमें गेहूँ के बराबर गीला चूना मिलाते और पी जाते।
चमत्कार का आरंभ
शुरुआत के 10 दिन कोई खास फर्क नहीं पड़ा। रामदीन निराश होने लगे थे। लेकिन बाबा ने कहा था, "आयुर्वेद जड़ पर काम करता है, जादू नहीं दिखाता। धैर्य रखो।"
पंद्रहवें दिन, रामदीन को लगा कि उनके घुटनों की कटकट आवाज कम हो गई है। एक महीने बाद, वह बिना लाठी के आंगन तक चलने लगे।
तीन महीने बीतते-बीतते चमत्कार हुआ।
रामदीन काका खेत पर वापस लौट आए थे। कुदाल फिर से उनकी मुट्ठी में थी। जो डॉक्टर ऑपरेशन की बात कर रहा था, वह रामदीन को खेत में काम करता देख अपनी कार रोककर बाहर आया।
"काका! आपने कौन से अस्पताल में इलाज कराया?" डॉक्टर ने पूछा।
रामदीन ने गर्व से कहा, "डॉक्टर साहब, मैंने 'चूना थेरेपी' ली है। मात्र 2 रुपये के चूने ने मेरा 2 लाख का ऑपरेशन बचा लिया।"
चूने की चौपाल
रामदीन की सेहत की खबर आग की तरह फैली। अब शाम को रामदीन के घर के बाहर 'चूने की चौपाल' लगने लगी। गाँव के लोग अपनी-अपनी समस्याएं लेकर आते, और रामदीन उन्हें बाबा का दिया ज्ञान बांटते।
उन्होंने चूने के और भी अद्भुत फायदे बताए जो उन्होंने अनुभव किए थे:
बच्चों के लिए: "मेरा नाती, छोटू, जो कद में नहीं बढ़ रहा था और पढ़ने में भी कमजोर था, मैंने उसे रोज दाल में चूना दिया। एक साल में उसकी हाइट भी बढ़ी और अब वह क्लास में फर्स्ट आता है। चूना बुद्धि और लंबाई दोनों बढ़ाता है।"
महिलाओं के लिए: "गाँव की विमला को माहवारी में बहुत दर्द होता था और खून की कमी (Anemia) थी। चूना खाने से उसका दर्द गायब हो गया। रजोनिवृत्ति (Menopause) के समय औरतों को जो हड्डियों में कमजोरी और चिड़चिड़ापन होता है, उसका सबसे बड़ा इलाज चूना है।"
गर्भवती महिलाओं के लिए: "गर्भावस्था में सबसे ज्यादा कैल्शियम चाहिए। अगर माँ अनार के रस में चूना मिलाकर पिए, तो बच्चा स्वस्थ, गोरा और बेहद बुद्धिमान पैदा होता है। और डिलीवरी भी नॉर्मल होती है।"
पीलिया (Jaundice): "गन्ने के रस में गेहूँ बराबर चूना मिलाकर पीने से पीलिया 3-4 दिन में ठीक हो जाता है।"
विज्ञान और विश्वास का मिलन
गाँव के स्कूल के साइंस टीचर, मास्टर दीनानाथ, पहले इसे अंधविश्वास मानते थे। एक दिन वे रामदीन के पास आए।
"काका, मुझे विज्ञान के हिसाब से समझाओ। यह चूना आखिर करता क्या है?"
रामदीन ने हँसते हुए कहा, "मास्टर जी, आप तो ज्ञानी हैं। आप ही बताइए।"
दीनानाथ ने शोध किया और पाया:
"यह सच है। चूना यानी कैल्शियम कार्बोनेट। हमारा शरीर मिट्टी से बना है, और कैल्शियम इसका प्रमुख तत्व है। जब खून में कैल्शियम कम होता है, तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम खींचने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis) और जोड़ों का दर्द होता है। चूना दुनिया का सबसे सस्ता और सबसे जल्दी पचने वाला (Absorbable) कैल्शियम स्रोत है। और तो और, यह शरीर के पीएच लेवल (pH Level) को भी बैलेंस करता है। एसिडिटी को खत्म करके शरीर को क्षारीय (Alkaline) बनाता है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियां पास नहीं आतीं।"
मास्टर जी ने स्कूल की प्रार्थना सभा में बच्चों को बताया, "चूना केवल पुताई का सामान नहीं, यह गरीबों का स्वर्ण भस्म है।"
एक कड़वी सीख (अति सर्वत्र वर्जयेत)
गाँव के एक और किसान, लल्लन, ने सोचा कि अगर एक दाने से इतना फायदा है, तो मैं ज्यादा खाकर जल्दी ठीक हो जाऊंगा। उसने एक चम्मच चूना पानी में घोलकर पी लिया।
अगले ही दिन लल्लन के पेट में भयंकर दर्द हुआ और उसे पेशाब में जलन होने लगी। डॉक्टर ने बताया कि ज्यादा चूने ने उसकी आंतों में घाव कर दिए हैं।
रामदीन ने गाँव वालों को इकट्ठा किया और चेतावनी दी:
"भाइयो! अमृत भी मात्रा से अधिक लेने पर विष बन जाता है। याद रखो—सिर्फ गेहूँ का दाना। और जिसे पथरी है, उसे तो छूना भी नहीं है।"
लल्लन ठीक हो गया, लेकिन इस घटना ने सबको अनुशासन सिखा दिया।
निष्कर्ष
आज रामदीन काका 70 साल के हैं, लेकिन उनकी कमर सीधी है। उनके घर में कोई कैल्शियम की गोलियां नहीं खाता। रसोई के एक कोने में मिट्टी की एक छोटी मटकी रखी है, जिसमें चूना पानी में डूबा रहता है।
जब भी कोई शहर से आता है और पूछता है, "काका, आपकी जवानी का राज क्या है?"
तो रामदीन मुस्कुराकर उस सफ़ेद मटकी की ओर इशारा करते हैं और कहते हैं:
"भगवान ने बीमारी दी है, तो इलाज भी मिट्टी में ही छुपा रखा है। बस, पान वाले से चूना मांगो, तंबाकू नहीं। चूना लगाओ मत, चूना खाओ—सही तरीके से!"

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