समय के स्वामी: तिथियों और नक्षत्रों का रहस्य
प्राचीन काल में राजा चंद्रसेन का राज्य समृद्ध था, लेकिन राजा संतानहीन होने के कारण सदैव चिंतित रहते थे। उन्होंने अनेकों यज्ञ और दान किए, परंतु कोई फल न मिला। अंत में, वे निराश होकर अपने कुलगुरु महर्षि अत्रि के आश्रम पहुँचे।
राजा ने व्यथा सुनाई, "गुरुदेव! क्या मेरा प्रारब्ध इतना कठोर है कि मुझे पितृऋण से मुक्ति नहीं मिलेगी?"
महर्षि अत्रि ने अपनी दिव्य दृष्टि से राजा की कुंडली देखी और मुस्कुराए। उन्होंने कहा, "राजन! तुम केवल ग्रहों को दोष दे रहे हो, जबकि तुमने 'समय के देवताओं' (तिथियों और नक्षत्रों) की उपेक्षा की है। हर तिथि और हर नक्षत्र का एक स्वामी (देवता) होता है। यदि तुम सही समय के स्वामी को प्रसन्न कर लो, तो प्रारब्ध भी बदला जा सकता है।"
राजा ने जिज्ञासावश पूछा, "प्रभु, यह रहस्य मुझे समझाएं।"
महर्षि ने ज्ञान का पिटारा खोला:
"राजन! तिथियां चंद्रमा की कलाएं हैं।
- प्रतिपदा (पहली तिथि) के स्वामी अग्निदेव हैं। उनकी पूजा से घर में धन-धान्य और तेज की वृद्धि होती है।
- पंचमी के स्वामी नागदेवता हैं, उनकी पूजा से कुल की रक्षा होती है और विष-भय मिटता है।
- अष्टमी के स्वामी स्वयं रुद्र (शिव) हैं, जो ज्ञान और मोक्ष देते हैं।
- चतुर्दशी के स्वामी भी शिव हैं, और अमावस्या पितरों को समर्पित है।"
फिर उन्होंने नक्षत्रों का महत्व बताया:
"नक्षत्र तो ब्रह्मांड की आँखें हैं, राजन।
- रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रह्मा (प्रजापति) हैं। इस नक्षत्र में पूजा करने से सृजन शक्ति और संतान सुख मिलता है।
- पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं, जो बुद्धि और राज-सम्मान देते हैं।
- मघा नक्षत्र पितरों का है, जो वंश वृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।"
महर्षि ने राजा को आदेश दिया, "राजन! तुम्हारी कुंडली में रोहिणी नक्षत्र प्रबल है। तुम रोहिणी नक्षत्र वाली पंचमी तिथि की प्रतीक्षा करो। उस दिन नागदेवता और प्रजापति ब्रह्मा की संयुक्त पूजा करो। यह काल-योग तुम्हारे भाग्य को बदल देगा।"
राजा चंद्रसेन ने गुरु की आज्ञा मानी। उन्होंने पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त की प्रतीक्षा की और पूरी श्रद्धा से रोहिणी नक्षत्र युक्त पंचमी को महायज्ञ किया। उन्होंने समय के देवताओं को उनका उचित भाग दिया।
कुछ ही समय बाद, राज्य में किलकारियाँ गूँज उठीं। राजा को एक तेजस्वी पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। राजा समझ गए कि ब्रह्मांड में कुछ भी यादृच्छिक (Random) नहीं है; तिथियां और नक्षत्र केवल कैलेंडर की तारीखें नहीं, बल्कि जाग्रत देवता हैं, और उनके पूजन का फल अचूक है।

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