सोनम बेवफ़ा




शहर के कोने में स्थित उस छोटी-सी किराए की कोठरी में अजय आज फिर अकेला बैठा था। दीवारों पर चुप्पी थी, और उसकी आँखों में टूटे सपनों की चुभन। एक वक़्त था जब उसकी दुनिया बसती थी सिर्फ़ सोनम में।

सोनम, एक साधारण गाँव की लड़की, जिसकी मुस्कान अजय के लिए ज़िंदगी का सुर बन गई थी। दोनों ने पढ़ाई के दिनों में साथ जीने-मरने की कसम खाई थी। अजय ने नौकरी लगते ही माँ-बाप की मर्जी के खिलाफ जाकर सोनम से शादी की।

शादी के बाद शुरुआत तो अच्छी रही, लेकिन फिर सोनम बदलने लगी।

सोनम की आँखों में अब अजय के लिए वो पहले जैसी चमक नहीं थी। मोबाइल पर छिप-छिप कर बातें, घर के बाहर बिना बताए देर तक रुकना, और फिर झूठ के जाल में उलझे जवाब — अजय सब समझने लगा था, लेकिन उसने कभी शक नहीं किया।

"वो थकी होती होगी", "शायद कोई परेशानी है" — अजय खुद को समझाता रहा।

लेकिन एक दिन... वो सब सामने आ गया।


एक चिट्ठी और एक सच

अजय के ऑफिस से लौटते ही, घर सूना पड़ा था। बेड पर एक चिट्ठी रखी थी:

"अजय, मुझे माफ करना। मैं और रोहन अब साथ जा रहे हैं। तुम्हारे साथ जो रिश्ता था, वो मेरी मजबूरी थी। तुम अच्छे इंसान हो, लेकिन मैं तुम्हारी नहीं हूँ।"

अजय की दुनिया वहीं थम गई।

लोगों ने कहा — "सोनम बेवफ़ा थी!" मगर अजय ने कभी बद्दुआ नहीं दी।

उसने बस इतना कहा —"शायद मैं उसकी मोहब्बत के काबिल नहीं था, या शायद मोहब्बत अब इस ज़माने की चीज़ नहीं रही।" 

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