सरिता की बहू: एक रिश्ते की अनकही समझ

 

सरिता की बहू: एक रिश्ते की अनकही समझ
Sarita ki bahu

'सास' - यह शब्द सुनते ही अक्सर हमारे मन में एक सख्त, नियमों में बंधी और हमेशा टोकने वाली महिला की छवि बनती है। पर हर सास सिर्फ सास नहीं होती; वह एक माँ भी होती है, एक पत्नी होती है, और एक ऐसी औरत होती है जिसने ज़िंदगी के कई उतार-चढ़ाव देखे होते हैं। यह कहानी है ऐसी ही एक सास, सरिता, की। और यह कहानी है सरिता की बहू, यानी मेघा, की, जिसने अपनी सास की खामोशी के पीछे छिपे दर्द को समझा।

यह कहानी है उस अनूठे रिश्ते की, जिसने सास-बहू की पारंपरिक परिभाषा को एक नया आयाम दिया।

जब मेघा शादी करके उस घर में आई, तो उसका स्वागत हुआ एक शांत और अनुशासित माहौल से। उसकी सास, सरिता जी, एक विधवा थीं। वह कम बोलती थीं, और उनके चेहरे पर एक अजीब सी उदासी हमेशा छाई रहती थी। वह घर के हर काम को एक मशीन की तरह, बिना किसी भावना के करती थीं।

मेघा, एक चुलबुली और ज़िंदादिल लड़की थी। उसे अपनी सास का यह रूखापन बहुत खटकता था। वह पूरी कोशिश करती कि वह अपनी सास का दिल जीत सके, पर सरिता जी हमेशा उससे एक दूरी बनाए रखतीं।

यह एक आम सास-बहू के रिश्ते की गलतफहमी थी। मेघा को लगता था कि उसकी सास उसे पसंद नहीं करतीं।

इस कहानी के एक और महत्वपूर्ण किरदार हैं, मेघा के पति, मोहित। मोहित अपनी माँ से बहुत प्यार करता था, पर वह उनके अतीत के दर्द से अनभिज्ञ था।

"माँ ऐसी ही हैं, मेघा," वह अक्सर कहता। "पापा के जाने के बाद, वह बिल्कुल बदल गई हैं। तुम उनकी बातों का बुरा मत माना करो।"

पर मेघा के लिए यह आसान नहीं था। उसे उस घर में एक अपनेपन की तलाश थी, जो उसे नहीं मिल रहा था।

कहानी में मोड़ तब आया, जब घर की सफाई करते हुए, मेघा को एक पुराना, धूल भरा संदूक मिला। उस संदूक में कुछ पुरानी, काले-सफ़ेद तस्वीरें और एक डायरी थी। वह डायरी सरिता जी की थी, उनके शादी से पहले के दिनों की।

अनजाने में ही, मेघा ने डायरी खोल ली।

जैसे-जैसे वह पन्ने पलटती गई, वह एक अलग ही सरिता से मिल रही थी। यह वह सरिता थी जो हँसती थी, जो कविताएँ लिखती थी, और जिसकी आँखों में सितार बजाने का सपना था। डायरी के पन्नों में उसके सपनों की, उसकी उम्मीदों की और मोहित के पिता के लिए उसके प्रेम की खुशबू बसी थी।

आखिरी पन्ने पर लिखा था - "कल मेरी शादी है। सब कहते हैं, शादी के बाद लड़कियों के सपने पूरे नहीं होते। पर मुझे विश्वास है, मेरे सपनों को एक नया आसमान मिलेगा।"

यह पढ़कर मेघा का दिल बैठ गया। उसने अपनी सास को कभी सितार बजाते नहीं देखा था, कभी कविता सुनाते नहीं सुना था। वह औरत, जो आज सिर्फ एक खामोश परछाई बनकर रह गई है, कभी सपनों से भरी एक ज़िंदादिल लड़की थी।

तभी उसकी नज़र संदूक के कोने में रखे एक पुराने, मखमली कपड़े में लिपटी हुई चीज़ पर पड़ी। उसने उसे खोला। वह एक सुंदर, नक्काशीदार सितार था, जिसके तार टूट चुके थे।

यह एक बहू का अपनी सास के अतीत से सामना था।

उस रात, मेघा ने मोहित को वह डायरी और वह सितार दिखाया।

"मोहित," उसने एक nghẹn ngat आवाज़ में कहा, "हम माँ को सिर्फ एक विधवा और एक सास के रूप में देखते रहे। पर हम यह भूल ही गए कि वह एक औरत भी हैं, जिसके अपने कुछ सपने थे, जो शायद जिम्मेदारियों के बोझ तले कहीं दब गए।"

यह एक बेटे का आत्म-बोध था। मोहित को पहली बार अपनी माँ के उस चेहरे के दर्शन हुए, जिसे उसने कभी नहीं देखा था।

अगले दिन, मेघा और मोहित ने एक फैसला किया। यह अपनी माँ के लिए, उनके खोए हुए सपनों के लिए एक छोटा सा त्याग था।

वे दोनों उस पुराने सितार को शहर के सबसे अच्छे कारीगर के पास ले गए और उसकी मरम्मत करवाई।

कुछ दिनों बाद, जब सरिता जी अपनी शाम की पूजा के बाद आँगन में बैठी थीं, तो मोहित और मेघा वह सितार लेकर उनके पास आए।

"माँ," मोहित ने धीरे से कहा, "आज आपकी बहू नहीं, आपकी बेटी आपसे कुछ माँगना चाहती है।"

मेघा ने वह सितार अपनी सास की गोद में रख दिया। "माँजी, क्या आप आज फिर से अपने सपनों को एक मौका देंगी? मेरे लिए... हमारे लिए।"

सरिता जी की आँखें अविश्वास से फैल गईं। वह कांपते हाथों से उस सितार को सहलाने लगीं, मानो वह अपने किसी बिछड़े हुए हिस्से को छू रही हों। उनकी शांत आँखों से सालों का दबा हुआ दर्द आँसुओं के रूप में बहने लगा।

उस शाम, सालों बाद, उस घर के आँगन में सितार के सुर गूँजे। सुर थोड़े बिखरे हुए थे, उंगलियाँ कांप रही थीं, पर उन सुरों में एक पूरी ज़िंदगी की अनकही कहानी थी।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हर सास कभी एक बहू थी, और हर बहू कभी एक बेटी। सरिता की बहू ने जब अपनी सास के अतीत को सम्मान दिया, तो उसने न सिर्फ एक सास का दिल जीता, बल्कि एक माँ, एक कलाकार और एक औरत को फिर से ज़िंदा कर दिया।

रिश्तों की खूबसूरती एक-दूसरे पर हुक्म चलाने में नहीं, बल्कि एक-दूसरे के अधूरे सपनों को समझने और उन्हें पूरा करने में मदद करने में है।

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