अमृता: गिलोय की संजीवनी और एक पिता का संघर्ष

 

अमृता: गिलोय की संजीवनी और एक पिता का संघर्ष
Giloy Benefits

 गिलोय के फायदे और उपयोग: इम्युनिटी बढ़ाने की अद्भुत कहानी   जानिए गिलोय (अमृता) के चमत्कारी फायदे। पढ़िए रमेश की सच्ची कहानी जिसने डेंगू और बुखार को गिलोय के काढ़े से हराया और अपने परिवार को नई जिंदगी दी।


 डर का साया (The Shadow of Fear)

दिल्ली की एक घनी आबादी वाली कॉलोनी में रमेश अपने छोटे से परिवार के साथ रहता था। रमेश एक प्राइवेट कंपनी में क्लर्क था और उसकी पत्नी, सुनीता, घर संभालती थी। उनका 8 साल का बेटा, आरव, उनकी जान था।
लेकिन यह साल रमेश के लिए बहुत भारी था। मॉनसून आते ही शहर में डेंगू और वायरल बुखार का कहर टूट पड़ा। अस्पतालों में बेड नहीं थे, और प्लेटलेट्स की कमी से लोग दम तोड़ रहे थे।

एक शाम, आरव स्कूल से लौटा तो उसका शरीर तप रहा था। रमेश ने थर्मामीटर लगाया—103 डिग्री बुखार। सुनीता घबरा गई। उन्होंने डॉक्टर को दिखाया, दवाइयां दीं, लेकिन बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा था।
दो दिन बाद, ब्लड रिपोर्ट आई। आरव के प्लेटलेट्स (Platelets) तेजी से गिर रहे थे। डॉक्टर ने कहा, "रमेश जी, स्थिति गंभीर है। इसे तुरंत भर्ती करना होगा।"

रमेश ने अपनी सारी जमा-पूंजी लगा दी। महंगे इंजेक्शन, ड्रिप, ब्लड ट्रांसफ्यूजन—सब कुछ किया गया। लेकिन आरव की हालत सुधर नहीं रही थी। वह कमजोर होता जा रहा था। रमेश अस्पताल के गलियारे में बैठकर रोता रहता। उसे अपनी बेबसी पर गुस्सा आ रहा था। पैसा पानी की तरह बह रहा था, लेकिन उसका बेटा ठीक नहीं हो रहा था।

 नीम का पेड़ और वो बेल (The Neem Tree and the Creeper)

रमेश के घर के पीछे एक छोटा सा आंगन था, जहाँ एक पुराना नीम का पेड़ था। उस पेड़ पर एक मोटी, हरे रंग की बेल (Liana) लिपटी हुई थी। रमेश ने कई बार सोचा था कि इसे काट दे, क्योंकि यह पूरे पेड़ को ढक रही थी।
लेकिन रमेश के पिताजी (जो अब नहीं रहे) हमेशा कहते थे, "बेटा, यह साधारण बेल नहीं है। यह 'नीम गिलोय' है। यह जिस पेड़ पर चढ़ती है, उसके गुण ले लेती है। नीम पर चढ़ी गिलोय तो सोना है।"

एक दिन, रमेश का पड़ोसी, शर्मा काका, उसे अस्पताल में मिलने आए। शर्मा काका पुराने जमाने के वैद्य थे।
उन्होंने आरव की हालत देखी और रमेश के कंधे पर हाथ रखा।
"रमेश, तू अस्पताल के चक्कर काट रहा है, जबकि तेरे घर के पीछे संजीवनी उगी है।"
रमेश ने हैरान होकर पूछा, "संजीवनी?"
"हां, वो गिलोय की बेल। डॉक्टर अपना काम कर रहे हैं, करने दे। लेकिन तू चुपके से गिलोय का काढ़ा बनाकर बच्चे को पिला। यह प्लेटलेट्स को रॉकेट की तरह ऊपर ले जाएगी।"

रमेश पहले तो हिचकिचाया। डॉक्टर मना करेंगे। लेकिन मरता क्या न करता? उसने सोचा, एक बार कोशिश करने में क्या हर्ज है।

 काढ़ा बनाने की विधि (The Preparation)

रमेश घर दौड़ा। उसने नीम के पेड़ से लिपटी उस बेल का एक अंगूठे जितना मोटा तना (Stem) काटा।
शर्मा काका के बताए अनुसार उसने विधि शुरू की:

  1. कूटना: तने को धोकर उसे इमामदस्ते में अच्छी तरह कूटा।
  2. उबालना: दो गिलास पानी में कूटी हुई गिलोय डाली। साथ में 4-5 तुलसी के पत्ते, एक छोटा टुकड़ा अदरक और थोड़ी काली मिर्च डाली।
  3. धीमी आंच: उसे तब तक उबाला जब तक पानी आधा (एक गिलास) न रह गया।

उसने उस हरे-भूरे रंग के कड़वे काढ़े को एक बोतल में भरा और अस्पताल ले गया।
जब नर्स नहीं देख रही थी, उसने चम्मच से आरव को थोड़ा-थोड़ा करके पिलाया। आरव ने कड़वाहट की वजह से मुंह बनाया, लेकिन रमेश ने कहा, "बेटा, यह जादुई पानी है। पी ले, सुपरमैन बन जाएगा।"

  चमत्कार (The Miracle)

अगले 24 घंटे रमेश के लिए बहुत भारी थे।
सुबह डॉक्टर राउंड पर आए। उन्होंने फिर से ब्लड टेस्ट कराया।
जब रिपोर्ट आई, तो डॉक्टर की आंखें फटी रह गईं।
"यह कैसे हो सकता है?" डॉक्टर बड़बड़ाए। "कल तक प्लेटलेट्स 20,000 थे, आज सीधे 60,000 हो गए? रातों-रात इतना उछाल?"

रमेश की आंखों में आंसू आ गए। यह दवा का नहीं, उस 'अमृता' का असर था।
अगले तीन दिन तक रमेश ने आरव को सुबह-शाम गिलोय का काढ़ा दिया। बुखार पूरी तरह उतर गया। शरीर में ताकत आ गई।
डॉक्टर ने आरव को डिस्चार्ज करते हुए कहा, "रमेश जी, आपकी किस्मत अच्छी है। बच्चे की इम्युनिटी बहुत स्ट्रॉन्ग निकली।"
रमेश मन ही मन मुस्कुराया। वह जानता था कि यह किस्मत नहीं, गिलोय थी।

  गिलोय का विज्ञान (The Science of Giloy)

घर लौटने के बाद रमेश ने गिलोय के बारे में पढ़ना शुरू किया। वह हैरान रह गया कि जिस बेल को वह जंगली घास समझ रहा था, वह आयुर्वेद का सबसे बड़ा खजाना थी।

उसे पता चला:

  1. इम्यूनोमॉड्यूलेटर (Immunomodulator): गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती नहीं, बल्कि 'संतुलित' करती है। यह व्हाइट ब्लड सेल्स (WBC) को एक्टिव करती है जो बैक्टीरिया और वायरस से लड़ते हैं।
  2. ज्वरनाशक (Antipyretic): यह पुराने से पुराने बुखार (Chronic Fever) को जड़ से खत्म करती है। इसलिए इसे 'जीवंतिका' भी कहते हैं।
  3. खून की सफाई: यह शरीर से टॉक्सिन्स बाहर निकालती है और खून को साफ करती है।
  4. डायबिटीज में फायदेमंद: यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करती है (Hypoglycemic agent)।

रमेश ने सोचा, "अगर यह इतना गुणकारी है, तो हम बीमार क्यों पड़ते हैं? क्योंकि हम प्रकृति से दूर हो गए हैं।"

 पूरे मोहल्ले की रक्षा (Protecting the Community)

रमेश अब रुका नहीं। उसने देखा कि उसके मोहल्ले में कई लोग बीमार थे। किसी को जोड़ों का दर्द था, किसी को बार-बार सर्दी-जुकाम होता था।
रमेश ने अपने घर की गिलोय की बेल से डंडियां काटीं और पड़ोसियों को बांटना शुरू किया।
उसने सबको तरीका समझाया: "इसे गमले में लगा लो। यह कहीं भी उग जाती है। और रोज सुबह इसका एक इंच टुकड़ा पानी में उबालकर पियो।"

धीरे-धीरे, पूरी कॉलोनी में बदलाव दिखने लगा। उस सर्दी में, जब पूरा शहर फ्लू से परेशान था, रमेश की कॉलोनी के लोग स्वस्थ थे।
शर्मा काका ने रमेश की पीठ थपथपाई, "बेटा, तूने सिर्फ अपने बेटे को नहीं बचाया, तूने अपनी परंपरा को बचाया है।"

 एक नई जीवनशैली (A New Lifestyle)

आज रमेश के घर में सुबह की शुरुआत चाय से नहीं, गिलोय और तुलसी के काढ़े से होती है।
उसकी पत्नी सुनीता, जिसे अक्सर जोड़ों में दर्द (Arthritis) रहता था, अब फुर्ती से काम करती है। गिलोय में 'एंटी-इंफ्लेमेटरी' (सूजन कम करने वाले) गुण होते हैं।

आरव अब बीमार नहीं पड़ता। वह स्कूल की फुटबॉल टीम का कैप्टन है।
रमेश अक्सर अपने बेटे को उस नीम के पेड़ के पास ले जाता है और कहता है, "बेटा, याद रखना, सबसे महंगी दवाइयां सबसे अच्छी नहीं होतीं। ईश्वर ने सबसे अच्छी दवाइयां मुफ्त में दी हैं—धूप, हवा, और यह गिलोय।"

निष्कर्ष (Moral):
स्वास्थ्य एक निवेश है, और प्रकृति हमारी सबसे बड़ी बैंक। गिलोय (अमृता) वह संजीवनी है जो हमें हर मौसम और हर बीमारी से लड़ने की ताकत देती है। इसे अपने आंगन में जगह दें, यह आपको जीवन देगी।

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